बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) द्वारा ली गई मोटरयान निरीक्षक (एमवीआइ) की नियुक्ति परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। वर्ष 2011 से 2016 तक 33 पदों पर बहाली हुई थी, जिसमें 13 उम्मीदवारों को फर्जी तरीके से नौकरी दी गई।
बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट के आदेश पर 163 अभ्यर्थियों की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कराया गया था, लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव ने सूची में सात नए नाम जोड़कर हाईकोर्ट भेज दिया। उनके पुराने और नए अंक की जानकारी नहीं दी।
खुलासा एक आरटीआइ कार्यकर्ता ने किया है। उसने संबंधित दस्तावेज एसआइटी के एक वरीय अधिकारी को सिपुर्द कर दिए हैं। हैरानी की बात है कि चार एमवीआइ एक ही परिवार के हैं। वे खुद को एक बड़े नेता का करीबी रिश्तेदार बताते हैं।
एसआइटी के अधिकारी का कहना है कि फर्जीवाड़ा की जानकारी परिवहन विभाग और राज्य सरकार को दी गई है। कागजात का सत्यापन करा अगर उनकी ओर से मामला दर्ज कराया गया तो आगे की कार्रवाई वैसे ही की जाएगी, जैसे इंटरस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा की धांधली में हुई।
संशोधित नियमावली से हुई नियुक्ति
बीएसएससी ने परिवहन विभाग में एमवीआइ के 59 पदों पर बहाली के लिए वर्ष 2007 में विज्ञापन दिया था। योग्यता ऑटोमोबाइल्स अथवा मैकेनिकल से डिप्लोमा मांगी गई। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस धारक ही आवेदक हो सकते थे।
राज्य सरकार की नियुक्ति नियमावली (2003) के अनुसार 75 अंकों की लिखित परीक्षा के बाद 25 अंकों का साक्षात्कार होता। लेकिन यह तभी संभव है, जब एक पद के लिए दस अथवा उससे अधिक लोग उम्मीदवारी पेश करें। चूंकि उक्त पदों के लिए लगभग 200 लोगों ने आवेदन दिया था, इसलिए 2008 में नियमावली में संशोधन किया गया। जिसमें केवल 25 अंकों के साक्षात्कार पर नियुक्ति की गई।
कटऑफ से कम अंक वालों को मिली कुर्सी
नियमावली के अनुसार सामान्य श्रेणी के लिए 40 फीसद, पिछड़ा वर्ग के लिए 36.5 फीसद, पिछड़ा वर्ग (1) के लिए 34 फीसद और अनुसूचित जाति व जनजाति एवं महिला के लिए 32 फीसद का कटऑफ तय किया गया है। इस परीक्षा के लिए 25 अंक पर कटऑफ निकला। बावजूद इसके कटऑफ से भी कम अंक प्राप्त होने वाले अभ्यर्थियों को एमवीआइ की कुर्सी मिल गई।
जून 2011 में 20 लोगों की नियुक्ति हुई, जिसमें से 13 अभ्यर्थी जालसाजी कर बहाल कराए गए। इसके बाद वर्ष 2012-13 में 12 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई। पिछले साल आलोक कुमार को नियुक्त किया गया, जो वर्तमान में सुपौल जिले में एमवीआइ हैं। इनमें बहाल सुशील कुमार पांडेय की आकस्मात मौत हो गई थी।
सांसद ने उठाया था मुद्दा
राज्यसभा सांसद अली अनवर ने वर्ष 2008 में एमवीआइ की नियुक्ति परीक्षा में धांधली का मुद्दा उठाया था। उन्होंने 18 मार्च 2008 को बीएसएससी के अध्यक्ष को पत्र भेज पांच अभ्यर्थियों के कागजात में त्रुटि और जालसाजी की बात कही थी।
पत्र की प्रतिलिपि तत्कालीन मुख्यमंत्री, परिवहन विभाग के मंत्री और सचिव, राज्य सरकार के मुख्य सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव और बीएसएससी के सचिव को भी भेजी थी। लेकिन नतीजा सिफर रहा।
Via Jagran
बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट के आदेश पर 163 अभ्यर्थियों की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन कराया गया था, लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव ने सूची में सात नए नाम जोड़कर हाईकोर्ट भेज दिया। उनके पुराने और नए अंक की जानकारी नहीं दी।
खुलासा एक आरटीआइ कार्यकर्ता ने किया है। उसने संबंधित दस्तावेज एसआइटी के एक वरीय अधिकारी को सिपुर्द कर दिए हैं। हैरानी की बात है कि चार एमवीआइ एक ही परिवार के हैं। वे खुद को एक बड़े नेता का करीबी रिश्तेदार बताते हैं।
एसआइटी के अधिकारी का कहना है कि फर्जीवाड़ा की जानकारी परिवहन विभाग और राज्य सरकार को दी गई है। कागजात का सत्यापन करा अगर उनकी ओर से मामला दर्ज कराया गया तो आगे की कार्रवाई वैसे ही की जाएगी, जैसे इंटरस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा की धांधली में हुई।
संशोधित नियमावली से हुई नियुक्ति
बीएसएससी ने परिवहन विभाग में एमवीआइ के 59 पदों पर बहाली के लिए वर्ष 2007 में विज्ञापन दिया था। योग्यता ऑटोमोबाइल्स अथवा मैकेनिकल से डिप्लोमा मांगी गई। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस धारक ही आवेदक हो सकते थे।
राज्य सरकार की नियुक्ति नियमावली (2003) के अनुसार 75 अंकों की लिखित परीक्षा के बाद 25 अंकों का साक्षात्कार होता। लेकिन यह तभी संभव है, जब एक पद के लिए दस अथवा उससे अधिक लोग उम्मीदवारी पेश करें। चूंकि उक्त पदों के लिए लगभग 200 लोगों ने आवेदन दिया था, इसलिए 2008 में नियमावली में संशोधन किया गया। जिसमें केवल 25 अंकों के साक्षात्कार पर नियुक्ति की गई।
कटऑफ से कम अंक वालों को मिली कुर्सी
नियमावली के अनुसार सामान्य श्रेणी के लिए 40 फीसद, पिछड़ा वर्ग के लिए 36.5 फीसद, पिछड़ा वर्ग (1) के लिए 34 फीसद और अनुसूचित जाति व जनजाति एवं महिला के लिए 32 फीसद का कटऑफ तय किया गया है। इस परीक्षा के लिए 25 अंक पर कटऑफ निकला। बावजूद इसके कटऑफ से भी कम अंक प्राप्त होने वाले अभ्यर्थियों को एमवीआइ की कुर्सी मिल गई।
जून 2011 में 20 लोगों की नियुक्ति हुई, जिसमें से 13 अभ्यर्थी जालसाजी कर बहाल कराए गए। इसके बाद वर्ष 2012-13 में 12 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई। पिछले साल आलोक कुमार को नियुक्त किया गया, जो वर्तमान में सुपौल जिले में एमवीआइ हैं। इनमें बहाल सुशील कुमार पांडेय की आकस्मात मौत हो गई थी।
सांसद ने उठाया था मुद्दा
राज्यसभा सांसद अली अनवर ने वर्ष 2008 में एमवीआइ की नियुक्ति परीक्षा में धांधली का मुद्दा उठाया था। उन्होंने 18 मार्च 2008 को बीएसएससी के अध्यक्ष को पत्र भेज पांच अभ्यर्थियों के कागजात में त्रुटि और जालसाजी की बात कही थी।
पत्र की प्रतिलिपि तत्कालीन मुख्यमंत्री, परिवहन विभाग के मंत्री और सचिव, राज्य सरकार के मुख्य सचिव, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव और बीएसएससी के सचिव को भी भेजी थी। लेकिन नतीजा सिफर रहा।
Via Jagran

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