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उत्तराखंड : अब स्थायी नहीं बल्कि कांट्रेक्ट पर रखे जाएंगे सरकारी टीचर

टीचर की सरकारी नौकरी जल्द ही बीते जमाने की बात हो जाएगी। सरकारी स्कूलों में टीचरों के खाली पदों को भविष्य में स्थायी नियुक्ति के बजाय कांट्रेक्ट के भरा जाएगा।
उत्तराखंड सरकार की मंशा है कि टीचरों के रिक्त पदों को भविष्य में स्थायी नियुक्ति के बजाय कांट्रेक्ट के आधार पर भरा जाए। यही वजह है कि टीचरों के पद लगातार समाप्त किए जा रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एवं प्रवक्ताओं के 31059 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2700 पदों को पहले ही समाप्त किया जा चुके हैं। जबकि अब बेसिक शिक्षा के चार हजार से अधिक पदों को भी समाप्त करने की तैयारी है। इसकी वजह स्कूलों में तेजी से घटती छात्र संख्या को बताया जा रहा है।
बताया गया है कि 265 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं है। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल भी हैं, जिनमें छात्रों की संख्या दस या इससे भी कम रह गई है।
सूत्रों के मुताबिक छात्रों की घटती संख्या के चलते धीरे-धीरे विभाग में टीचरों के पदों को समाप्त कर भविष्य में होने वाली नियुक्तियां फिक्स वेतन पर कांट्रेक्ट के आधार पर करने की तैयारी है। विभागीय मंत्री अरविंद पांडे की ओर से अधिकारियों को इसके निर्देश दिए जा चुके हैं।
टीचरों के स्वीकृत पद  
कुमाऊं मंडल में प्रवक्ताओं के 4902 और सहायक अध्यापकों के 8508 पद स्वीकृत हैं। जबकि गढ़वाल मंडल में प्रवक्ताओं के 6465 एवं सहायक अध्यापकों के 11184 पद स्वीकृत हैं। इसके अलावा प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में टीचरों के लगभग 45000 पद स्वीकृत हैं।
सरकार की मंशा है कि शिक्षा विभाग में भविष्य में कांट्रेक्ट के आधार पर टीचरों की नियुक्तियां की जाएं। इससे शिक्षा गुणवत्ता में सुधार आएगा। वहीं इससे हर छोटी-छोटी बात पर शिक्षक संगठनों के आंदोलन जैसी समस्या नहीं रहेगी।
- अरविंद पांडे, शिक्षा मंत्री
Via AmarUjala

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