‘अब कहां बचता है गठबंधन.’ जेडीयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी के इस बयान के बाद राजनैतिक हल्कों में चर्चा चरम पर है. पटना से लेकर दिल्ली तक बस चर्चा यही है कि बिहार में ‘महागठबंधन’ में दरार आ गई है. बस इंतजार इस बात का है कि ये दरार अलगाव में कब तब्दील होती है.
के सी त्यागी का बयान बस यूं ही नहीं आया है. के सी त्यागी समेत जेडीयू के अन्य नेता इस बात से आहत हैं कि उनके नेता पर अब आरजेडी के बाद कांग्रेस की तरफ से भी हमला बोला जा रहा है. कांग्रेस नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की तरफ से जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में दिए बयान के बाद से ही जेडीयू नेता आग बबूला हैं.
आजाद ने कहा था नीतीश का कोई सिद्धांत नहीं है
गुलाम नबी आजाद ने एक दिन पहले ही कहा था ‘जिन लोगों के एक सिद्धांत होते हैं वो एक फैसला लेते हैं लेकिन, जो कई सिद्धांतों को मानते हैं वो अलग-अलग फैसले लेते हैं.’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का ये बयान सीधे बिहार के मुख्यमंत्री के सिद्धांत के उपर है. आजाद ये दिखाना चाहते हैं कि नीतीश कुमार का कोई सिद्धांत नहीं वो एक साथ कई लोगों को साधने की कोशिश करते हैं.
अब भला जेडीयू अपने सबसे बड़े नेता के ऊपर किए गए हमले को बर्दाश्त कैसे करती. जवाब आना ही था और आया भी. के सी त्यागी के अलावा जेडीयू नेता श्याम रजक ने पटना से हमला बोला. श्याम रजक ने कांग्रेस की हैसियत पर सवाल खड़े कर दिए.
के सी त्यागी का बयान बस यूं ही नहीं आया है. के सी त्यागी समेत जेडीयू के अन्य नेता इस बात से आहत हैं कि उनके नेता पर अब आरजेडी के बाद कांग्रेस की तरफ से भी हमला बोला जा रहा है. कांग्रेस नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद की तरफ से जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में दिए बयान के बाद से ही जेडीयू नेता आग बबूला हैं.
आजाद ने कहा था नीतीश का कोई सिद्धांत नहीं है
गुलाम नबी आजाद ने एक दिन पहले ही कहा था ‘जिन लोगों के एक सिद्धांत होते हैं वो एक फैसला लेते हैं लेकिन, जो कई सिद्धांतों को मानते हैं वो अलग-अलग फैसले लेते हैं.’ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद का ये बयान सीधे बिहार के मुख्यमंत्री के सिद्धांत के उपर है. आजाद ये दिखाना चाहते हैं कि नीतीश कुमार का कोई सिद्धांत नहीं वो एक साथ कई लोगों को साधने की कोशिश करते हैं.
अब भला जेडीयू अपने सबसे बड़े नेता के ऊपर किए गए हमले को बर्दाश्त कैसे करती. जवाब आना ही था और आया भी. के सी त्यागी के अलावा जेडीयू नेता श्याम रजक ने पटना से हमला बोला. श्याम रजक ने कांग्रेस की हैसियत पर सवाल खड़े कर दिए.
बिहार में महागठबंधन के भीतर कांग्रेस तीसरे नंबर की पार्टी है. लेकिन, उसके बावजूद नीतीश पर हमला किये जाने के बाद श्याम रजक ने कांग्रेस को उसकी औकात दिखाने की कोशिश की है.
जेडीयू और कांग्रेस के बीच वाक्युद्ध जारी है. इसकी परिणति आगे चलकर क्या होगी, इसका अंदाजा अभी से ही लगाया जा सकता है.
समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम में जेडीयू के उपर ही सवाल खड़े किए हैं. फिलहाल लालू के करीबी माने जा रहे शिवानंद तिवारी ने पूछा है कि ‘जेडीयू के पास कैसी अथॉरिटी है.’
नीतीश ने किया कोविंद का समर्थन तो बिखरने लगा महागठबंधन
राष्ट्रपति चुनाव में शुरू हुई महागठबंधन के बीच की दरार दिनों दिन बढ़ती चली जा रही है. पहले आरजेडी और जेडीयू के बीच तू-तू मैं मैं हुई. अब जेडीयू और कांग्रेस के बीच की तनातनी इस ‘महागठबंधन’ में ‘महादरार’ को और चौड़ी कर रही है.
नीतीश कुमार की तरफ से कांग्रेस को ठेंगा दिखाए जाने के बाद कांग्रेस इस बात को पचा नहीं पा रही है. लेकिन, आखिर इस तरह की नौबत क्यों और कैसे आई. क्या नीतीश को कांग्रेस और आरजेडी का साथ रास नहीं आ रहा है.
दरअसल, नीतीश कुमार लालू यादव के साथ ज्यादा असहज दिख रहे हैं. लालू यादव के परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के ताजा आरोपों ने नीतीश कुमार को असहज कर दिया है. लालू का हाथ पकड़े नीतीश हमेशा उनसे अलग हटकर अपनी छवि को बेहतर बनाए रखना चाहते हैं. ऐसे में उनके मंत्रिमंडल के दो सहयोगी तेजस्वी और तेजप्रताप के उपर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने नीतीश को मुश्किल में डाल दिया है.
विपक्ष में लालू की बढ़ती अहमियत अखर रही है नीतीश को
राष्ट्रपति चुनाव के वक्त भी विपक्षी खेमे में लालू यादव की बढ़ रही अहमियत नीतीश कुमार को नहीं भा रही है. यही वजह है कि वो कभी विपक्षी दलों के भोज से नदारद रहे तो कभी विपक्षी दलों की बैठक से पहले ही कोविंद के नाम पर अपनी मुहर लगा दी.
ये सब कुछ उनकी सोची-समझी रणनीति है जिसमें वो किसी भी सूरत में दागदार लालू से दूरी बनाकर रखना चाहते हैं.
लेकिन, लालू से उनकी यही दूरी ने कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते को भी उस मोड़ पर ला कर खड़ा कर दिया है जिसमें कांग्रेस की नजर में दागदार लालू अब ज्यादा भरोसेमंद लगने लगे हैं. तभी तो कांग्रेस अब सीधे नीतीश पर हमलावर है.
बिहार के महागठबंधन में अब नीतीश एक तरफ हो गए हैं तो लालू-कांग्रेस दूसरी तरफ. बयानों के तीर फिलहाल चल रहे हैं. लेकिन, अभी दोनों ही खेमों से आ रहे बयान चार साल पहले 2013 की याद दिला रहे हैं जब मोदी विरोध के नाम पर नीतीश ने बीजेपी का साथ छोड़ा था.
अब जुलाई में जदयू की राज्य और राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक पर नजर
पहले छुटभैये नेताओं की बयानबाजी शुरू हुई थी और फिर धीरे-धीरे माहौल ऐसे ही बिगड़ता चला गया जहां से वापस लौटने की सारी गुंजाईशें खत्म हो गई. अब सबकी नजरें आने वाले दिनों में राष्ट्रपति चुनाव के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव पर टिकी होंगी जिसपर नीतीश का कदम क्या होगा.
उसके पहले जुलाई में होने वाली जेडीयू के प्रदेश के अधिकारियों की बैठक और फिर राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक भी काफी महत्वपूर्ण होंगी जिसमें आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है.
लेकिन, इसके पहले बीजेपी नेता सुशील मोदी और बीजेपी के सहयोगी रामविलास पासवान की तरफ से नीतीश के स्वागत की तैयारियों ने भविष्य का संकेत देना शुरू कर दिया है.
Via FirstPost

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