यकीनन ये 1962 वाला भारत नहीं है जो पीछे हट जाए .. इस बार सत्ता और समाज बदल चुका है . अब ना ही वो सेना है और ना ही वो समाज .. इस बार चीन को सब बता देने को आतुर हैं की भारत को आँख दिखाना अपने आप में ही एक गुनाह है …. भारत की फ़ौज ने जो कार्य किया वो ना सिर्फ दुनिया में बढ़ते रुतबे का परीक बना है अपितु संसार में भारत की धाक भी जमा चुका है जिस पर चीन की घुड़कियाँ कोई असर नहीं कर पाई ..ज्ञात हो की अपनी फ़ौज ने डोकालम इलाके में लम्बा वक्त बिताने का फैसला किया है . फ़ौज ने उस इलाके मे अपना बेस , अपना तम्बू लगा लिया है … चिल्लाते चीन की हर धमकी को उसी के अंदाज़ में प्रतिउत्तर देते हुए भारत की फ़ौज ने अपने इरादे साफ़ कर दिए की पीछे चीन को ही हटना होगा . भारत ने उस इलाके में अपने सैनिकों की संख्या भी बढ़ा ली है जिसे रॉयल भूटान आर्मी का भी पूरा समर्थन मिल रहा है … ये २२ वां दिन है जब डोकालम में भारत और चीन की फौजें आमने सामने हैं . ये स्थान एक ट्राई जंक्शन है जो भारत भूटान और चीन की सीमाओं का त्रिकोण सा बनाता है ..भारत की फ़ौज और भारत की सत्ता के इस आक्रामक अंदाज़ ने चीन के वहां सड़क बनाने के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया है .
सटीक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय फ़ौज के इस 10 हजार फीट ऊंचे स्थान पर शिविर बनाने से ये बात साफ़ हो चुकी है की भारत इस इलाके को छोड़ने वाला नहीं है . भारत का साफ़ कहना है की पहले वहां से चीन की फौजों को हटना होगा उसके बाद ही भारत की फ़ौज वहां से हटने पर विचार करेगी .. जानकारी ये भी है की सैनिकों को उन सभी जरूरत के सामान भेजे जा रहे हैं जो वहां लम्बे समय तक रहने के लिए जरूरी होते हैं
0 comments:
Post a Comment