कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में पोलीग्राफ टेस्ट (झूठ पकड़ने वाली मशीन से जांच) कराने के लिए सहमति देने से आज इंकार कर दिया।कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में पोलीग्राफ टेस्ट (झूठ पकड़ने वाली मशीन से जांच) कराने के लिए सहमति देने से आज इंकार कर दिया। इस मामले में सीबीआई ने उन्हें तीन मौकों पर क्लीनचिट दी थी। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट शिवाली शर्मा के समक्ष दायर हलफनामे में टाइटलर ने कहा कि वह यह परीक्षण नहीं कराना चाहते। सीबीआई ने टाइटलर का यह परीक्षण कराने की मांग की थी। इस मामले में एक प्रमुख गवाह विवादित हथियार कारोबारी अभिषेक वर्मा के वकील ने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल की तबियत ठीक नहीं है। उन्होंने उन्हें निजी पेशी के लिए समय देने का अनुरोध किया।
अदालत ने वर्मा के वकील को समय देते हुए आगे की कार्यवाही के लिए दो जून की तारीख तय की। अदालत ने नौ मई को टाइटलर तथा वर्मा को निर्देश दिया था कि वे इस बारे में ‘‘स्पष्ट’’ जवाब दें कि वे पोलीग्राफ टेस्ट कराना चाहते हैं या नहीं। अदालत ने कहा था कि परीक्षण के लिए उनकी सहमति लेने की सीबीआई की याचिका विचारणीय है।अदालत ने कहा था कि अगर सहमति के लिए कोई शर्त है तो टाइटलर और वर्मा को निजी रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण देना चाहिए।पहले भी ये खबर आई थी कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में सीबीआई द्वारा क्लीनचिट पाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश टाइटलर ने लाइव डिटेक्श टेस्ट कराने से इंकार कर दिया था। टाइटलर के वकील उनकी ओर से दलील देते हुए कहा कि वे लाइव डिटेक्शन टेस्ट देने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि यह प्रक्रिया क्रूरता वाली है। टाइटलर के वकीन का यह भी कहना है कि उन्हें सीबीआई ने उन्हें ऐसे टेस्ट करने का कोई विशेष कारण नहीं दिया था, लिहाजा इस मामले से संबंधित जांच एजेंसी की अर्जी कानून का पूरी तरह से दुरपयोग माना जाएगा। गौरतलब है कि फरवरी में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर का लाई डिटेक्शन टेस्ट यानी झूठ पकड़ने वाला टेस्ट करने की सीबीआई की मांग पर उन्हें पेश होने का निर्देश दिया था। सीबीआई ने टाइटलर के अलावा हथियार कारोबारी अभिषेक वर्मा पर भी यह परीक्षण करने की मांग की थी।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने सीबीआई की इस मांग पर टाइटलर और वर्मा को शुक्रवार (10 फरवरी) को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आपको बता दें कि यह मामला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के अगले दिन एक नवंबर, 1984 को उत्तरी दिल्ली में गुरुद्वारा पुलबंगश में तीन लोगों की हत्या से जुड़ा है। इस मामले में सीबीआई टाइटलर को तीन बार क्लीन चिट दे चुकी है लेकिन जांच एजेंसी को अदालत ने इसकी और जांच करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने वर्मा के वकील को समय देते हुए आगे की कार्यवाही के लिए दो जून की तारीख तय की। अदालत ने नौ मई को टाइटलर तथा वर्मा को निर्देश दिया था कि वे इस बारे में ‘‘स्पष्ट’’ जवाब दें कि वे पोलीग्राफ टेस्ट कराना चाहते हैं या नहीं। अदालत ने कहा था कि परीक्षण के लिए उनकी सहमति लेने की सीबीआई की याचिका विचारणीय है।अदालत ने कहा था कि अगर सहमति के लिए कोई शर्त है तो टाइटलर और वर्मा को निजी रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण देना चाहिए।पहले भी ये खबर आई थी कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में सीबीआई द्वारा क्लीनचिट पाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश टाइटलर ने लाइव डिटेक्श टेस्ट कराने से इंकार कर दिया था। टाइटलर के वकील उनकी ओर से दलील देते हुए कहा कि वे लाइव डिटेक्शन टेस्ट देने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि यह प्रक्रिया क्रूरता वाली है। टाइटलर के वकीन का यह भी कहना है कि उन्हें सीबीआई ने उन्हें ऐसे टेस्ट करने का कोई विशेष कारण नहीं दिया था, लिहाजा इस मामले से संबंधित जांच एजेंसी की अर्जी कानून का पूरी तरह से दुरपयोग माना जाएगा। गौरतलब है कि फरवरी में दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर का लाई डिटेक्शन टेस्ट यानी झूठ पकड़ने वाला टेस्ट करने की सीबीआई की मांग पर उन्हें पेश होने का निर्देश दिया था। सीबीआई ने टाइटलर के अलावा हथियार कारोबारी अभिषेक वर्मा पर भी यह परीक्षण करने की मांग की थी।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने सीबीआई की इस मांग पर टाइटलर और वर्मा को शुक्रवार (10 फरवरी) को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। आपको बता दें कि यह मामला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के अगले दिन एक नवंबर, 1984 को उत्तरी दिल्ली में गुरुद्वारा पुलबंगश में तीन लोगों की हत्या से जुड़ा है। इस मामले में सीबीआई टाइटलर को तीन बार क्लीन चिट दे चुकी है लेकिन जांच एजेंसी को अदालत ने इसकी और जांच करने का निर्देश दिया था।

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