साबरमती एक्सप्रेस में हुए बम विस्फोट के नामजद आरोपियों के अदालत से दोषमुक्त होने के पीछे अभियोजन की लचर पैरवी मुख्य वजह दिख रही है। जिस घटना में एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी हो और एक की मौत हो गई हो उसी में दो आरोपियों के दोषमुक्त होने से पैरवीकारों पर सवालिया निशान उठ रहे हैं।मुकदमे में पैरवी के लिए जिला प्रशासन ने एक कमेटी का भी गठन किया था, उसके बावजूद अभियोजन पक्ष इसका फायदा नहीं उठा सका।
करीब 17 साल पहले 14 अगस्त 2000 की रात फैजाबाद से लखनऊ जा रही साबरमती एक्सप्रेस में करीब 11 बजे रौजागांव रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट हुआ था। इस घटना में 11 यात्रियों की मौत हो गई थी वहीं 40 घायल हुए थे।
पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने इस मामले में जीआरपी बाराबंकी में हत्या, हत्या के प्रयास के अलावा, देशद्रोही गतिविधियों में केस दर्ज किया था। पुलिस ने साजिश रचने के आरोप में गुलजार बानी व सिमी के सक्रिय कार्यकर्ता अहमद मुबीन, मारूफ व मोहम्मद आकिल को पकड़ा था। इन आरोपियों ने वारदात को अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस करने का बदला बताया था।
करीब 17 साल पहले 14 अगस्त 2000 की रात फैजाबाद से लखनऊ जा रही साबरमती एक्सप्रेस में करीब 11 बजे रौजागांव रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट हुआ था। इस घटना में 11 यात्रियों की मौत हो गई थी वहीं 40 घायल हुए थे।
पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने इस मामले में जीआरपी बाराबंकी में हत्या, हत्या के प्रयास के अलावा, देशद्रोही गतिविधियों में केस दर्ज किया था। पुलिस ने साजिश रचने के आरोप में गुलजार बानी व सिमी के सक्रिय कार्यकर्ता अहमद मुबीन, मारूफ व मोहम्मद आकिल को पकड़ा था। इन आरोपियों ने वारदात को अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस करने का बदला बताया था।
- जांच एजेंसियों ने पहले इस मामले में मारूफ नाम के एक व्यक्ति को अरेस्ट किया था उसके बाद आगरा में हुए बम विस्फोट में पकड़े गए सिमी आतंकी अहमद मुबीन व उनके साथी मोहम्मद आकिल को पकड़ा था।
- मामले की सुनवाई के दौरान जहां आरोपी मोहम्मद आकिल की मौत हो चुकी है वहीं मारूफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है जबकि गुलजार बानी व मुबीन पर केस चल रहा था।
- साबरमती बम कांड की जांच करने वाली पुलिस टीम ने बताया था कि सिमी व हिजबुल मुजाहिदीन संगठनों के इशारे पर वारदात होने के सुबूत मिले थे। इसी के आधार पर पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।
- जिला प्रशासन द्वारा साबरमती बम कांड मामले में अभियोजन पैरवी के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में वरिष्ठ संयुक्त निदेशक अभियोजन आरके उपाध्याय, डीजीसी क्रिमिनल अमरेश विक्रम सिंह, एडीजीसी अमर सिंह यादव व मथुरा प्रसाद वर्मा को शामिल किया गया था।
- वहीं एएसपी कुवंर ज्ञानंजय सिंह जहां मामले पर नजर रखे थे वहीं एटीएस, एसआईबी व खुफिया एजेंसी के पदाधिकारी भी बराबर लगे हुए थे लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका।

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