तेल कंपनियों ने पेट्रोल डीजलों की कीमतों में रोजाना तब्दीली के नियम को आज से लागू कर दिया। इस नियम के तहत कंपनियां रोजाना तेल की कीमतों में बदलाव कर सकेंगी। हालांकि अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि इस नियम का फायदा तेल कंपनियों को होगा या ग्राहकों को।
वैसे सरकार की दलील है कि इससे आम आदमी को ही फायदा मिलेगा लेकिन पहली नजर में ये तर्क गले से उतरना मुश्किल है। दूसरे, पेट्रोल पंप मालिक भी सरकर के इस निर्णय की आलोचना कर रहे हैं। हालांकि इसको लेकर उनकी अपनी समस्या है, जो तकनीकी भी है और आर्थिक भी।
वहीं, इसका सबसे ज्यादा फायदा तेल कंपनियों को मिलना तय है जिन्हें अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की घटती-बढ़ती कीमतों का बोझ अब किसी भी तरह अपनी जेब पर नहीं झेलना पड़ेगा, इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर ही पड़ेगा।
बाजार के हवाले हुए उपभोक्ता
तेल कंपनियों के इस फैसले के बाद सबसे बड़ी बात ये है कि अब तेल उपभोक्ता पूरी तरह बाजार के हवाले हो गए हैं, पेट्रोल या डीजल की जो भी मौजूदा कीमत होगी उसके अनुसार रोजाना रेट तय किए जाएंगे। हालांकि रेट तय करते समय डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।
मान लीजिए डॉलर के मुकाबले रुपया टूटता है तो इससे तेल खरीदना भी महंगा हो जाएगा जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है। तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती हैं तो भी कीमतों पर असर पड़ेगा और आम जनता को महंगा तेल खरीदना पड़ेगा।
हां, अगर तेल की कीमतें सस्ती होती हैं और रुपया भी स्थिर या मजबूत है तो जरूर कीमतों में कमी की जाएगी जिसका लाभ जनता को मिल सकता है। जबकि पहले 15 दिन में कीमतें तय होने पर आम जनता को कुछ नहीं तो 15 दिन के लिए तो राहत मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कोई उम्मीद नहीं है।
इसके अलावा आम जनता को राहत मिलने की दूसरी सूरत तब होगी जब सरकार अपने टैक्स में कमी कर दे लेकिन इसकी संभावना कम ही दिखाई देती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी तेल की कीमतें बड़े अंतर से कम हुई हैं सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपनी जेब भरनी शुरू कर दी है, नतीजतन आम जनता को इसका खास फायदा नहीं मिल पाया।
तेल कंपनियों को मिला सुरक्षा कवच
नए नियम के बाद तय है कि सरकार ने तेल कंपनियों को एक ऐसा सुरक्षा कवच मुहैया करा दिया है जिसमें उन्हें किसी भी सूरत में घाटा नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ें या घटें इसका असर आम आदमी की जेब पर ही देखने को मिलेगा कंपनियों की नहीं। तेल के इस खेल में उनका मुनाफा तय है।
दूसरा समय-समय पर कंपनियां अगर अपनी लागत मूल्य बढ़ाती हैं तो भी इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इस आशंका से पेट्रोल पंप डीलर सरकार को चेता चुके हैं लेकिन इस मुद्दे पर सरकार ने अभी कोई राय नहीं रखी है। हालांकि सारी बात ये भी है कि ये सारा अंतर कुछ पैसों का ही होगा जिसे आम आदमी शायद ही महसूस करे लेकिन ये मामूली असर तेल कंपनियों की झोली भरने के लिए काफी है।
Via AmarUjala
वैसे सरकार की दलील है कि इससे आम आदमी को ही फायदा मिलेगा लेकिन पहली नजर में ये तर्क गले से उतरना मुश्किल है। दूसरे, पेट्रोल पंप मालिक भी सरकर के इस निर्णय की आलोचना कर रहे हैं। हालांकि इसको लेकर उनकी अपनी समस्या है, जो तकनीकी भी है और आर्थिक भी।
वहीं, इसका सबसे ज्यादा फायदा तेल कंपनियों को मिलना तय है जिन्हें अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की घटती-बढ़ती कीमतों का बोझ अब किसी भी तरह अपनी जेब पर नहीं झेलना पड़ेगा, इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर ही पड़ेगा।
बाजार के हवाले हुए उपभोक्ता
तेल कंपनियों के इस फैसले के बाद सबसे बड़ी बात ये है कि अब तेल उपभोक्ता पूरी तरह बाजार के हवाले हो गए हैं, पेट्रोल या डीजल की जो भी मौजूदा कीमत होगी उसके अनुसार रोजाना रेट तय किए जाएंगे। हालांकि रेट तय करते समय डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।
मान लीजिए डॉलर के मुकाबले रुपया टूटता है तो इससे तेल खरीदना भी महंगा हो जाएगा जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है। तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती हैं तो भी कीमतों पर असर पड़ेगा और आम जनता को महंगा तेल खरीदना पड़ेगा।
हां, अगर तेल की कीमतें सस्ती होती हैं और रुपया भी स्थिर या मजबूत है तो जरूर कीमतों में कमी की जाएगी जिसका लाभ जनता को मिल सकता है। जबकि पहले 15 दिन में कीमतें तय होने पर आम जनता को कुछ नहीं तो 15 दिन के लिए तो राहत मिल जाती थी, लेकिन अब इसकी कोई उम्मीद नहीं है।
इसके अलावा आम जनता को राहत मिलने की दूसरी सूरत तब होगी जब सरकार अपने टैक्स में कमी कर दे लेकिन इसकी संभावना कम ही दिखाई देती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी तेल की कीमतें बड़े अंतर से कम हुई हैं सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपनी जेब भरनी शुरू कर दी है, नतीजतन आम जनता को इसका खास फायदा नहीं मिल पाया।
तेल कंपनियों को मिला सुरक्षा कवच
नए नियम के बाद तय है कि सरकार ने तेल कंपनियों को एक ऐसा सुरक्षा कवच मुहैया करा दिया है जिसमें उन्हें किसी भी सूरत में घाटा नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ें या घटें इसका असर आम आदमी की जेब पर ही देखने को मिलेगा कंपनियों की नहीं। तेल के इस खेल में उनका मुनाफा तय है।
दूसरा समय-समय पर कंपनियां अगर अपनी लागत मूल्य बढ़ाती हैं तो भी इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इस आशंका से पेट्रोल पंप डीलर सरकार को चेता चुके हैं लेकिन इस मुद्दे पर सरकार ने अभी कोई राय नहीं रखी है। हालांकि सारी बात ये भी है कि ये सारा अंतर कुछ पैसों का ही होगा जिसे आम आदमी शायद ही महसूस करे लेकिन ये मामूली असर तेल कंपनियों की झोली भरने के लिए काफी है।
Via AmarUjala

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