सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने मंगलवार को हाल में भीड़ द्वारा ‘पीट-पीटकर हत्या’ की घटनाओं के विरोध में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार वापस कर दिया। वहीं एंकर श्वेता सिंह ने इसे लेकर निशाना साधा है।
गैर सरकारी संगठन ‘अनहद’ की प्रमुख हाशमी ने राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग के कार्यालय में जाकर पुरस्कार लौटा दिया। 2008 में इस पुरस्कार से सम्मानित शबनम ने कहा कि यह पुरस्कार देने वाला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अपनी पूरी विश्वसनीयता खो चुका है। उन्होंने बताया कि जिस तरह देश में मुसलमानों के खिलाफ सांप्रदायिक उन्माद का माहौल बनाया जा रहा है और अखलाक, पहलू खान तथा अब जुनैद की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की गई, इससे व्यथित होकर उन्होंने पुरस्कार लौटाने फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से हिन्दू राष्ट्र बनाने की कोशिशें चल रही हैं और उसके लिए देश में मुसलमानों के खिलाफ घृणित प्रचार किया जा रहा है, जिसका नतीजा यह है कि जुनैद जैसा किशोर भी भीड़ द्वारा पीट-पीटकर सरेआम मार दिया जा रहा है और सरकार तमाशबीन बनी रहती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग इस मुद्दे पर खुलकर साथ नहीं देता और उनके अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाता, इसलिए उसके विरोध में उन्होंने पुरस्कार लौटा दिया। शबनम की अवार्ड वापसी के बाद एंकर श्वेता सिंह ने ट्वीट कर लिखा, ‘मेरे पास कोई सरकारी अवॉर्ड होता, तो केरल की असंख्य हत्याओं के लिए लौटा देती।’ दरअसल केरल की कम्युनिस्ट सरकार में भाजपा/आरएसएस से जुड़े लोगो की हत्याओं के कई मामले सामने आये हैं, इन हत्याओं का आरोप राज्य सरकार पर लगता रहा है।
श्वेता सिंह ने ट्वीट पर एक यूजर हेमंत कुमार ने लिखा "‘मेरे पास होता तो कश्मीरी पंडितों पर हुए अन्याय और अभी तक विस्थापित जीवन और धारा 370 के विरोध में लौट देता।"

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