दार्जिलिंग में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बीते कुछ दिनों से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का चल रहा प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। गुरूवार को GJM के दफ्तर पर छापेमारी के बाद हालात और भी ज्यादा बिगड़ गए हैं। बताते चलें कि कल पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में पुलिस ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) दल पर शिकंजा कसने की कोशिश की है। पुलिस ने जीजेएम के प्रमुख बिमल गुरुंग के दार्जिलिंग में स्थित ऑफिस पर छापेमारी की है। न्यूज एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक पुलिस ने ऑफिस से हथियार और पैसे बरामद किए हैं।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समर्थक इस छापेमारी से इस कदर नाराज हो गए हैं कि वे बेकाबू हो गए हैं और थाने को भी आग के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने जीजेएम के ऑफिस को सील कर दिया है और हालात पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।
इससे पहले दार्जिलिंग में अनिश्चितकालीन बंद के दौरान जीजेएम समर्थकों ने कई जगह पुलिस वालों पर पथराव किया था। आंदोलनकारियों ने सरकारी दफ्तरों को बंद कराने का प्रयास किया। उग्र प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। बांग्ला भाषा के साथ-साथ अब अलग गोरखालैंड की मांग के समर्थन में जीजेएम ने बंद की अपील की है। अनिश्चितकालीन बंद के दूसरे दिन गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थक सरकारी दफ्तरों को जबरन बंद कराते देखे गए। सोमवार को कई सरकारी दफ्तरों में आग लगाने की घटना को देखते हुए तमाम दफ्तरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
इस बीच, इलाके की चाय बागान यूनियनों ने भी मंगलवार से दो दिन की हड़ताल बुलाई है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने इस हड़ताल का समर्थन किया है। उधर मोर्चा के नेताओं ने पुलिस वालों पर शांतिपूर्ण तरीके से निकली रैली पर बिना किसी उकसावे के लाठी चार्ज करने का आरोप लगाया है। मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने कहा कि पुलिस ने बिना वजह लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हमारे खिलाफ जितना बल प्रयोग करेगी, अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में आंदोलन उतना ही तेज होगा।
दार्जिलिंग में बिगड़े हालातों के बाद केंद्र ने पश्चिम बंगाल के लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल उठा दिए हैं। गृहमंत्रालय ने ममता सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट मांगी है। छापेमारी पर सफाई देते हुए कार्यकर्ता बिनय तमांग ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों ने उनके पुराने उपकरणों को हथियारों की तरह पेश किया है। बिनय ने कहा कि इसी वजह से वे गोरखलैंड, अधिकार, संस्कृति के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष विमल गुरुंग ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के लोगों से अलग गोरखालैंड हासिल करने की खातिर आखिरी लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा है। अपने अज्ञात ठिकाने से शुक्रवार को स्थानीय लोगों के नाम जारी एक संदेश में उन्होंने कहा कि अलग राज्य के सपने को पूरा करने के लिए करो या मरो की लड़ाई का वक्त आ गया है। इसलिए लोगों को इस आखिरी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। कल अपने ठिकाने पर हुई छापेमारी के बाद से ही गुरुंग भूमिगत हैं।
गोरखा मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने पत्रकारों से कहा कि अब स्वायत्तता, गोरखालैंड टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) और दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद का दौर खत्म हो गया है। अब अलग गोरखालैंड की मांग पूरी नहीं होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच, जन आंदोलन पार्टी के नेता हरका बहादुर छेत्री ने सुरक्षा बलों के जरिए आंदोलन का मुकाबला करने की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रणनीति की आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि इससे पर्वतीय इलाके के लोगों के मन में अलगाव की भावना और मजबूत होगी। छेत्री ने कहा कि पुलिस के जरिए इलाके की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। गोरखा मोर्चा के पूर्व विधायक छेत्री ने दो साल पहले अपनी अलग पार्टी बनाई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समस्या को समाधान के लिए एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जानी चाहिए। छेत्री ने कहा कि उनकी पार्टी भी गोरखालैंड के गठन के पक्ष में है। लेकिन यह काम बातचीत के जरिए होना चाहिए।
इससे पहले दार्जिलिंग में अनिश्चितकालीन बंद के दौरान जीजेएम समर्थकों ने कई जगह पुलिस वालों पर पथराव किया था। आंदोलनकारियों ने सरकारी दफ्तरों को बंद कराने का प्रयास किया। उग्र प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। बांग्ला भाषा के साथ-साथ अब अलग गोरखालैंड की मांग के समर्थन में जीजेएम ने बंद की अपील की है। अनिश्चितकालीन बंद के दूसरे दिन गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थक सरकारी दफ्तरों को जबरन बंद कराते देखे गए। सोमवार को कई सरकारी दफ्तरों में आग लगाने की घटना को देखते हुए तमाम दफ्तरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
इस बीच, इलाके की चाय बागान यूनियनों ने भी मंगलवार से दो दिन की हड़ताल बुलाई है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने इस हड़ताल का समर्थन किया है। उधर मोर्चा के नेताओं ने पुलिस वालों पर शांतिपूर्ण तरीके से निकली रैली पर बिना किसी उकसावे के लाठी चार्ज करने का आरोप लगाया है। मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने कहा कि पुलिस ने बिना वजह लाठीचार्ज किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हमारे खिलाफ जितना बल प्रयोग करेगी, अलग गोरखालैंड राज्य की मांग में आंदोलन उतना ही तेज होगा।
दार्जिलिंग में बिगड़े हालातों के बाद केंद्र ने पश्चिम बंगाल के लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल उठा दिए हैं। गृहमंत्रालय ने ममता सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट मांगी है। छापेमारी पर सफाई देते हुए कार्यकर्ता बिनय तमांग ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों ने उनके पुराने उपकरणों को हथियारों की तरह पेश किया है। बिनय ने कहा कि इसी वजह से वे गोरखलैंड, अधिकार, संस्कृति के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष विमल गुरुंग ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के लोगों से अलग गोरखालैंड हासिल करने की खातिर आखिरी लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा है। अपने अज्ञात ठिकाने से शुक्रवार को स्थानीय लोगों के नाम जारी एक संदेश में उन्होंने कहा कि अलग राज्य के सपने को पूरा करने के लिए करो या मरो की लड़ाई का वक्त आ गया है। इसलिए लोगों को इस आखिरी लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। कल अपने ठिकाने पर हुई छापेमारी के बाद से ही गुरुंग भूमिगत हैं।
गोरखा मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने पत्रकारों से कहा कि अब स्वायत्तता, गोरखालैंड टेरीटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) और दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद का दौर खत्म हो गया है। अब अलग गोरखालैंड की मांग पूरी नहीं होने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच, जन आंदोलन पार्टी के नेता हरका बहादुर छेत्री ने सुरक्षा बलों के जरिए आंदोलन का मुकाबला करने की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रणनीति की आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि इससे पर्वतीय इलाके के लोगों के मन में अलगाव की भावना और मजबूत होगी। छेत्री ने कहा कि पुलिस के जरिए इलाके की समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। गोरखा मोर्चा के पूर्व विधायक छेत्री ने दो साल पहले अपनी अलग पार्टी बनाई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समस्या को समाधान के लिए एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जानी चाहिए। छेत्री ने कहा कि उनकी पार्टी भी गोरखालैंड के गठन के पक्ष में है। लेकिन यह काम बातचीत के जरिए होना चाहिए।

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